मैं अरु मोर तोर तैं माया। जेहिं बस कीन्हे जीव निकाया॥ माया जड़ है जैसे कुल्हाड़ी स्वयं कुछ नहीं कर… Read More
एक बार प्रभु सुख आसीना। लछिमन बचन कहे छलहीना।। लक्ष्मणजी के वचनों में ही क्या, उनके हृदय में, उनके आचरण… Read More
माया मरी न मन मरा, मर मर गये शरीर। संत कबीर ने कहा शरीर तो नष्ट हो जाता है पर… Read More
नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं॥ एक अकेला अहंकार ही जीव को नर्क की यात्रा… Read More
भरी उनकी आँखों में है कितनी करुणा। जहाँ स्वार्थ समाप्त होता है, वहीं से सच्ची मित्रता प्रारंभ होती है।सबसे अच्छा… Read More
बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा॥ रामजी हनुमान जी को बार-बार उठाना चाहते है, परंतु… Read More
जानें बिनु न होइ परतीती । बिनु परतीति होइ नहि प्रीती । जिसे हम जानते ही नहीं, उससे प्रेम कैसे… Read More
कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।। प्रभु रामजी का यह अद्भुत स्वभाव है कि वे कभी अपने पराक्रम… Read More
श्रवन सुजसु सुनि आयउँ प्रभु भंजन भव भीर। विभीषण की शरणागति के माध्यम से गोस्वामी जी- ने मनुष्य को ईश्वर की… Read More
गहि सरनागति राम की भवसागर की नाव। सभी युगों में शरणागति की महिमा भारी है सारे वेद, बेदान्त, रामायण, गीता… Read More