माया,मैं अरु मोर तोर तैं माया। जेहिं बस कीन्हे जीव निकाया॥

3 years ago

मैं अरु मोर तोर  तैं माया। जेहिं बस कीन्हे जीव निकाया॥   माया जड़ है जैसे कुल्हाड़ी स्वयं कुछ नहीं कर… Read More

माया,एक बार प्रभु सुख आसीना। लछिमन बचन कहे छलहीना।।

3 years ago

एक बार प्रभु सुख आसीना। लछिमन बचन कहे छलहीना।। लक्ष्मणजी के वचनों में ही क्या, उनके हृदय में, उनके आचरण… Read More

माया मरी न मन मरा, मर मर गये शरीर।

3 years ago

माया मरी न मन मरा, मर मर गये शरीर। संत कबीर ने कहा शरीर तो नष्ट हो जाता है पर… Read More

अहंकार,नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं॥

3 years ago

नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं॥ एक अकेला अहंकार ही जीव को नर्क की यात्रा… Read More

मानस चिंतन,भरी उनकी आँखों में है कितनी करुणा।

3 years ago

भरी उनकी आँखों में है कितनी करुणा। जहाँ स्वार्थ समाप्त होता है, वहीं से सच्ची मित्रता प्रारंभ होती है।सबसे अच्छा… Read More

प्रेम,बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा॥

3 years ago

बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा॥ रामजी हनुमान जी को बार-बार उठाना चाहते है, परंतु… Read More

मानस चिंतन,जानें बिनु न होइ परतीती । बिनु परतीति होइ नहि प्रीती ।

3 years ago

जानें बिनु न होइ परतीती । बिनु परतीति होइ नहि प्रीती । जिसे हम जानते ही नहीं, उससे प्रेम कैसे… Read More

कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।।

3 years ago

कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।। प्रभु रामजी का यह अद्भुत स्वभाव है कि वे कभी अपने पराक्रम… Read More

श्रवन सुजसु सुनि आयउँ प्रभु भंजन भव भीर।

3 years ago

श्रवन सुजसु सुनि आयउँ प्रभु भंजन भव भीर। विभीषण की शरणागति के माध्यम से गोस्वामी जी- ने मनुष्य को ईश्वर की… Read More

गहि सरनागति राम की भवसागर की नाव।

3 years ago

गहि सरनागति राम की भवसागर की नाव। सभी युगों में शरणागति की महिमा भारी है सारे वेद, बेदान्त, रामायण, गीता… Read More