रामकथा कलि बिटप कुठारी। सादर सुनु गिरिराजकुमारी॥ सादर सुनु॥ राम चरित आदर पूर्वक सुनना चाहिए मानस के चारो वक्ताओं ने… Read More
बंदों अवधपुरी आति पावनि। सरजू सारि कलिकलुष नसावनि॥ सरयू का साधारण अर्थ स से सीता रा से राम जू इसलिए… Read More
अवध प्रभाव जान तब प्राणी। जब उर बसें राम धनु पाणी।। किस कारण अयोध्या को विश्व का मस्तक कहा गया… Read More
बंदउँ संत असज्जन चरना। दुःखप्रद उभय बीच कछु बरना॥ जितनी वन्दना मानस में बाबा तुलसी ने की उतनी वंदना किसी… Read More
जिमि जिमि तापसु कथइ उदासा। तिमि तिमि नृपहि उपज बिस्वासा॥ अवतार के हेतु, प्रतापभानु साधारण धर्म में भले ही रत… Read More
बिस्व बिदित एक कैकय देसू। सत्यकेतु तहँ बसइ नरेसू॥ अवतार के हेतु, फल की आशा को त्याग कर कर्म करते रहना… Read More
स्वायंभू मनु अरु सतरूपा। जिन्ह तें भै नरसृष्टि अनूपा॥ अवतार के हेतु,ब्रह्म अवतार की विशेषता यह है कि इसमें रघुवीरजी… Read More
सुमिरत हरिहि श्राप गति बाधी। सहज बिमल मन लागि समाधी॥ अवतार के हेतु, कैलाश पर्वत तो पूरा ही पावन है… Read More
नारद श्राप दीन्ह एक बारा। कलप एक तेहि लगि अवतारा।। अवतार के हेतु, भगवान को राक्षस राज जालंधर की पतिव्रता… Read More
एक कलप सुर देखि दुखारे। समर जलंधर सन सब हारे॥ अवतार के हेतु, एक कल्प में सब देवताओं को जलन्धर… Read More