जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता।

3 years ago

जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता। रामायण में देवताओ की सरनागति रावण के द्वारा जो अत्याचार हो रहा है… Read More

परहित,वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर।

3 years ago

परहित,वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर।  साधु का स्वभाव परोपकारी होता है, जैसे वृक्ष कभी अपना फल… Read More

सरल,गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्हसन आयसु मागा॥

3 years ago

गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्हसन आयसु मागा॥ रामजी ने वसिष्ठजी से आज्ञा माँगी समस्त जगत के स्वामी राम सुंदर मतवाले श्रेष्ठ… Read More

सरल,जानहु मुनि तुम्ह मोर सुभाऊ। जन सन कबहुँ कि करऊँ दुराऊ॥

3 years ago

जानहु मुनि तुम्ह मोर सुभाऊ। जन सन कबहुँ कि करऊँ दुराऊ॥ राम जी नारद से हे मुनि! यहाँ प्रभु ने… Read More

सरल,रघुबंसिन्ह कर सहज सुभाऊ। मनु कुपंथ पगु धरइ न काऊ॥

3 years ago

रघुबंसिन्ह कर सहज सुभाऊ। मनु कुपंथ पगु धरइ न काऊ॥ श्री रामजी भाई लक्ष्मण से बोले- सहज सुभाऊ' अर्थात्‌ उनका मन… Read More

सरल,अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी॥

3 years ago

अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी॥ परशुरामजी (समर=युद्ध)करने पर तुले हुए और रामजी युद्ध नहीं करना… Read More

सरल,तब कर कमल जोरि रघुराई। बोले बचन श्रवन सुखदाई।।

3 years ago

तब कर कमल जोरि रघुराई। यहाँ रामजी ने हाथ जोड़ कर अपने ऐश्वर्य को छुपाया और मुनि वाल्मीकि जी के… Read More

सरल,नाइ सीसु पद अति अनुरागा। उठि रघुबीर बिदा तब मागा॥

3 years ago

नाइ सीसु पद अति अनुरागा।  अति अनुरागा। का भाव १४ वर्ष वनवास सुनकर रामजी के मन में किंचित मात्र भी… Read More

सरल,हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी। तुम्ह देखी सीता मृगनैनी॥

3 years ago

हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी। तुम्ह देखी सीता मृगनैनी॥ हे पक्षियों! हे पशुओं! हे भौंरों की पंक्तियों! तुमने कहीं… Read More

सरल,तब रघुपति जानत सब कारन। उठे हरषि सुर काजु सँवारन॥

3 years ago

तब रघुपति जानत सब कारन। श्रीरामजी को जहाँ भी कार्य आरंभ में हर्ष हुआ है पर कार्य की सफलता में… Read More