रामायण

रामायण भारतीय संस्कृति का एक महान और पवित्र ग्रंथ है, जिसमें भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, सत्य और मर्यादा का अद्भुत वर्णन मिलता है। इस श्रेणी में रामायण से जुड़े विभिन्न प्रसंग, कथाएँ, शिक्षाएँ और आध्यात्मिक रहस्य सरल हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं।

यहाँ आपको श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान जी और अन्य पात्रों के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंग मिलेंगे, जो न केवल भक्ति को मजबूत करते हैं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का मार्ग भी दिखाते हैं। रामायण का यह ज्ञान व्यक्ति के मन में शांति, सकारात्मकता और धर्म के प्रति आस्था बढ़ाता है।

जिमि जिमि तापसु कथइ उदासा। तिमि तिमि नृपहि उपज बिस्वासा॥

जिमि जिमि तापसु कथइ उदासा। तिमि तिमि नृपहि उपज बिस्वासा॥ अवतार के हेतु, प्रतापभानु  साधारण धर्म में भले ही रत… Read More

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बिस्व बिदित एक कैकय देसू। सत्यकेतु तहँ बसइ नरेसू॥

बिस्व बिदित एक कैकय देसू। सत्यकेतु तहँ बसइ नरेसू॥ अवतार के हेतु, फल की आशा को त्याग कर कर्म करते रहना… Read More

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स्वायंभू मनु अरु सतरूपा। जिन्ह तें भै नरसृष्टि अनूपा॥

स्वायंभू मनु अरु सतरूपा। जिन्ह तें भै नरसृष्टि अनूपा॥ अवतार के हेतु,ब्रह्म अवतार की विशेषता यह है कि इसमें रघुवीरजी… Read More

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सुमिरत हरिहि श्राप गति बाधी। सहज बिमल मन लागि समाधी॥

सुमिरत हरिहि श्राप गति बाधी। सहज बिमल मन लागि समाधी॥ अवतार के हेतु, कैलाश पर्वत तो पूरा ही पावन है… Read More

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नारद श्राप दीन्ह एक बारा। कलप एक तेहि लगि अवतारा।।

नारद श्राप दीन्ह एक बारा। कलप एक तेहि लगि अवतारा।। अवतार के हेतु, भगवान को राक्षस राज जालंधर की पतिव्रता… Read More

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राम जनम के हेतु अनेका। परम बिचित्र एक तें एका॥

राम जनम के हेतु अनेका। परम बिचित्र एक तें एका॥ राम अवतार के कारण 2-पार्वती जी विवाह के उपरांत भगवत… Read More

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तदपि एक मैं कहउँ उपाई। होइ करै जौं दैउ सहाई॥

तदपि एक मैं कहउँ उपाई। होइ करै जौं दैउ सहाई॥ पार्वती विवाह- हे पर्वतराज! ब्रह्मा जी ने जो ललाट पर लिख दिया… Read More

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माया मरी न मन मरा, मर मर गये शरीर।

माया मरी न मन मरा, मर मर गये शरीर। संत कबीर ने कहा शरीर तो नष्ट हो जाता है पर… Read More

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अहंकार,नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं॥

नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं॥ एक अकेला अहंकार ही जीव को नर्क की यात्रा… Read More

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मानस चिंतन,भरी उनकी आँखों में है कितनी करुणा।

भरी उनकी आँखों में है कितनी करुणा। जहाँ स्वार्थ समाप्त होता है, वहीं से सच्ची मित्रता प्रारंभ होती है।सबसे अच्छा… Read More

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