Mahender Upadhyay

मानस चिंतन,भरी उनकी आँखों में है कितनी करुणा।

भरी उनकी आँखों में है कितनी करुणा। जहाँ स्वार्थ समाप्त होता है, वहीं से सच्ची मित्रता प्रारंभ होती है।सबसे अच्छा… Read More

3 years ago

प्रेम,बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा॥

बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा॥ रामजी हनुमान जी को बार-बार उठाना चाहते है, परंतु… Read More

3 years ago

मानस चिंतन,जानें बिनु न होइ परतीती । बिनु परतीति होइ नहि प्रीती ।

जानें बिनु न होइ परतीती । बिनु परतीति होइ नहि प्रीती । जिसे हम जानते ही नहीं, उससे प्रेम कैसे… Read More

3 years ago

कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।।

कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।। प्रभु रामजी का यह अद्भुत स्वभाव है कि वे कभी अपने पराक्रम… Read More

3 years ago

श्रवन सुजसु सुनि आयउँ प्रभु भंजन भव भीर।

श्रवन सुजसु सुनि आयउँ प्रभु भंजन भव भीर। विभीषण की शरणागति के माध्यम से गोस्वामी जी- ने मनुष्य को ईश्वर की… Read More

3 years ago

गहि सरनागति राम की भवसागर की नाव।

गहि सरनागति राम की भवसागर की नाव। सभी युगों में शरणागति की महिमा भारी है सारे वेद, बेदान्त, रामायण, गीता… Read More

3 years ago

जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता।

जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता। रामायण में देवताओ की सरनागति-रावण के द्वारा जो अत्याचार हो रहा है वह… Read More

3 years ago

परहित,वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर।

परहित,वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर।  साधु का स्वभाव परोपकारी होता है, जैसे वृक्ष कभी अपना फल… Read More

3 years ago

सरल,गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्हसन आयसु मागा॥

गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्हसन आयसु मागा॥ रामजी ने वसिष्ठजी से आज्ञा माँगी समस्त जगत के स्वामी राम सुंदर मतवाले श्रेष्ठ… Read More

3 years ago

सरल,जानहु मुनि तुम्ह मोर सुभाऊ। जन सन कबहुँ कि करऊँ दुराऊ॥

जानहु मुनि तुम्ह मोर सुभाऊ। जन सन कबहुँ कि करऊँ दुराऊ॥ राम जी नारद से हे मुनि! यहाँ प्रभु ने… Read More

3 years ago