राम कथा कलिकामद गाई । सुजन संजीवन मूर सुहाई ।।
और रामनाम चिन्तामणि के समान दुख-दरिद्र नाशक है।
सनातन और बौद्ध—दोनों परम्पराओं में चिन्तामणि को इच्छा पूर्ति करने वाले दिव्य रत्न माना गया है। यह कल्पवृक्ष और कामधेनु की तरह इच्छित फल देती है।
अतः कलियुग की विशेषता यह नहीं कि साधन नष्ट हो गये, बल्कि यह कि अन्य दिव्य साधन दुर्लभ हो गये, पर भगवान का नाम अत्यन्त सरल और सर्वश्रेष्ठ आश्रय रूप में प्रकट हुआ।
जब कलयुग में कथा काम धेनु के समान है तब अन्य युगों में इस कथा के महत्त्व का वर्णन कौन कर सकता है? जैसे कामधेनु अपने आश्रित की अभिलाषाओं को पूर्ण करती है, वैसे ही रामकथा भी श्रोता की पात्रता और भावना के अनुसार उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करती है। किसी को उसमें भक्ति मिलती है, किसी को वैराग्य, किसी को ज्ञान और किसी को लोक तथा परलोक का कल्याण।और किसी किसी को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारो प्रदान करती है।
(कामद=कामनाओं अर्थात अभीष्ट मनोरथ को देने वाली) (सजीवनि= जिलानेवाली) (कामद गाई=कामधेनु)
तुलसीदासजी ने कहा राम नाम अत्यन्त पवित्र है, वेद-पुराणों का सार है, कल्याण का भवन है और अमंगलों को हरने वाला है।
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