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गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।

गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।। बाबा तुलसी ने रामजी की उस विशेषता का वर्णन कर रहे हैं… Read More

3 months ago

रामकथा कलि बिटप कुठारी। सादर सुनु गिरिराजकुमारी॥

रामकथा कलि बिटप कुठारी। सादर सुनु गिरिराजकुमारी॥ सादर सुनु॥ राम चरित आदर पूर्वक सुनना चाहिए मानस के चारो वक्ताओं ने… Read More

11 months ago

बंदों अवधपुरी आति पावनि। सरजू सारि कलिकलुष नसावनि॥

बंदों अवधपुरी आति पावनि। सरजू सारि कलिकलुष नसावनि॥ सरयू का साधारण अर्थ स से सीता रा से राम जू इसलिए… Read More

1 year ago

बंदउँ संत असज्जन चरना। दुःखप्रद उभय बीच कछु बरना॥

बंदउँ संत असज्जन चरना। दुःखप्रद उभय बीच कछु बरना॥ जितनी वन्दना मानस में बाबा तुलसी ने की उतनी वंदना किसी… Read More

2 years ago

सुमिरत हरिहि श्राप गति बाधी। सहज बिमल मन लागि समाधी॥

सुमिरत हरिहि श्राप गति बाधी। सहज बिमल मन लागि समाधी॥ अवतार के हेतु, कैलाश पर्वत तो पूरा ही पावन है… Read More

3 years ago

संसय,देखि देखि आचरन तुम्हारा। होत मोह मम हृदयँ अपारा॥

देखि देखि आचरन तुम्हारा। वशिष्ठ जी कहते है- ब्रह्मा जी के कहने पर मैंने उपरोहित्य अर्थात ब्राह्मण का कर्म द्वारा… Read More

4 years ago

पार्वती विवाह,जब तें सती जाइ तनु त्यागा। तब सें सिव मन भयउ बिरागा।।

जब तें सती जाइ तनु त्यागा। पार्वती विवाह- सती के साथ कैलाश पर नित्य कथा होती थी उनके ना रहने… Read More

4 years ago

रचि महेस निज मानस राखा। पाइ सुसमउ सिवा सन भाषा॥

रचि महेस निज मानस राखा। तुलसी ने मानस सरोवर की तुलना सामान्य सरोवर से कि है जैसे तलाब में प्रायः… Read More

4 years ago

प्रभु पहिचानि परेउ गहि चरना। सो सुख उमा जाइ नहिं बरना॥

प्रभु पहिचानि परेउ गहि चरना। हनुमान जी ने अपना विप्र रूप का वेष रखकर राम जी से पूछा- हे सावले… Read More

4 years ago

ईस्वर अंस जीव अबिनासी। चेतन अमल सहज सुख रासी।।

ईस्वर अंस जीव अबिनासी। तुलसीदासजी ने कहा-शुकदेवजी, सनकादि, नारदमुनि आदि जितने भक्त और परम ज्ञानी श्रेष्ठ मुनि हैं, मैं धरती… Read More

4 years ago