रामचरितमानस संपूर्ण रामायण गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक दिव्य ग्रंथ है, जिसमें भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और धर्म की गहन व्याख्या की गई है। इस श्रेणी में आपको रामचरितमानस के सभी कांड—बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड—का सरल हिंदी में भावार्थ, कथा और आध्यात्मिक चिंतन प्राप्त होगा।
यहाँ प्रस्तुत सामग्री न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले संस्कार, नीति और आदर्शों का भी मार्गदर्शन करती है। रामचरितमानस का यह संपूर्ण संग्रह भक्तों, साधकों और रामकथा प्रेमियों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जो श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सफल और शांतिपूर्ण बनाना चाहते हैं।
रामकथा कलि बिटप कुठारी। सादर सुनु गिरिराजकुमारी॥ सादर सुनु॥ राम चरित आदर पूर्वक सुनना चाहिए मानस के चारो वक्ताओं ने… Read More
बंदों अवधपुरी आति पावनि। सरजू सारि कलिकलुष नसावनि॥ सरयू का साधारण अर्थ स से सीता रा से राम जू इसलिए… Read More
बंदउँ संत असज्जन चरना। दुःखप्रद उभय बीच कछु बरना॥ जितनी वन्दना मानस में बाबा तुलसी ने की उतनी वंदना किसी… Read More
सुमिरत हरिहि श्राप गति बाधी। सहज बिमल मन लागि समाधी॥ अवतार के हेतु, कैलाश पर्वत तो पूरा ही पावन है… Read More
देखि देखि आचरन तुम्हारा। वशिष्ठ जी कहते है- ब्रह्मा जी के कहने पर मैंने उपरोहित्य अर्थात ब्राह्मण का कर्म द्वारा… Read More
जब तें सती जाइ तनु त्यागा। पार्वती विवाह3- सती के साथ कैलाश पर नित्य कथा होती थी उनके ना रहने… Read More
रचि महेस निज मानस राखा। तुलसी ने मानस सरोवर की तुलना सामान्य सरोवर से कि है जैसे तलाब में प्रायः… Read More
प्रभु पहिचानि परेउ गहि चरना। हनुमान जी ने अपना विप्र रूप का वेष रखकर राम जी से पूछा- हे सावले… Read More
ईस्वर अंस जीव अबिनासी। तुलसीदासजी ने कहा-शुकदेवजी, सनकादि, नारदमुनि आदि जितने भक्त और परम ज्ञानी श्रेष्ठ मुनि हैं, मैं धरती… Read More
प्रार्थना में दीन भाव जरूर बनाए रखें। दीन दयाल बिरिदु संभारी। प्रार्थना में आप मांग बनाए रखें या न रखें,… Read More