Mahender Upadhyay

जरा मरन दुख रहित तनु समर जितै जनि कोउ। एकछत्र रिपुहीन महि।

जरा मरन दुख रहित तनु समर जितै जनि कोउ। प्रताप भानु के मुठी में तीनो के तीन धर्म अर्थ काम… Read More

3 वर्ष ago

राम सप्रेम कहेउ मुनि पाहीं। नाथ कहिअ हम केहि मग जाहीं॥

राम सप्रेम कहेउ मुनि पाहीं।  प्रभु श्री राम स्वयं विष्णु के अवतार थे। उनके पास असीम शक्तियां थी, परंतु उन्होंने… Read More

3 वर्ष ago

असरन सरन बिरदु संभारी। मोहि जनि तजहु भगत हितकारी।।

असरन सरन बिरदु संभारी। अंगद ने कहा पिता के मरने पर में अशरण अर्थात अनाथ हो गया था तब आपने… Read More

3 वर्ष ago

कारन कवन नाथ नहिं आयउ। जानि कुटिल किधौं मोहि बिसरायउ।।

कारन कवन नाथ नहिं आयउ। भरत की दीनता=भरतजी जैसा संत जिसको राम जी भजते हैं। बृहस्पति जी इंद्र से भरतजी… Read More

3 वर्ष ago

मैं निसिचर अति अधम सुभाऊ। सुभ आचरनु कीन्ह नहिं काऊ॥

मैं निसिचर अति अधम सुभाऊ। विभीषण जी ने कहा-नाथ दसानन कर मैं भ्राता।  अपनी अधमता दिखाने के लिए अपने को… Read More

3 वर्ष ago

गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर। चरन कमल रज चाहति

गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर। राम शब्द का अर्थ परम ब्रह्म है। कालिदासजीने भी कहा हरि का… Read More

3 वर्ष ago

होइहि भजनु न तामस देहा। मन क्रम बचन मंत्र दृढ़ एहा॥

होइहि भजनु न तामस देहा। विभीषण में दीनता का भाव- विभीषण हनुमान से बोल रहे है तामस तनु कछु साधन… Read More

3 वर्ष ago

ता पर मैं रघुबीर दोहाई। जानउँ नहिं कछु भजन उपाई॥

ता पर मैं रघुबीर दोहाई। श्री हनुमान जी में भक्ति के सारे गुण है पर फिर भी अपने को गुण… Read More

3 वर्ष ago

सहज सरल सुनि रघुबर बानी। साधु साधु बोले मुनि ग्यानी॥

सहज सरल सुनि रघुबर बानी। भारद्वाज मुनि के आश्रम से चलते समय रामजी ने मुनि से कहा- हे नाथ! बताइए… Read More

3 वर्ष ago

नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥

नाथ संभुधनु भंजनिहारा। भगवान परशुराम कहते है कि यह धनुष भगवान विष्णु का है, आखिर यह संदेह मिटे कैसे, हे… Read More

3 वर्ष ago