Mahender Upadhyay

मम दरसन फल परम अनूपा। जीव पाव निज सहज सरूपा॥

मम दरसन फल परम अनूपा। भगवान राम का स्वभाव सहज और सरल है। ऐसा स्वभाव जिस भक्त का होता है… Read More

4 वर्ष ago

सलाह सम्मति विचार विमर्श परामर्श,नाथ कहिअ हम केहि मग जाहीं॥

राम सप्रेम कहेउ मुनि पाहीं। नाथ कहिअ हम केहि मग जाहीं॥ राम जी ने हमेशा सभी की सलाह से कार्य… Read More

4 वर्ष ago

हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई॥

हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई॥ राम अवतार के कारण भाव वाले भक्त का, भगवान पर… Read More

4 वर्ष ago

दीनता,नम्रता छोटा,मेरा मुझ में कुछ नहीं,जो कुछ है सो तोर ।

मेरा मुझ में कुछ नहीं,जो कुछ है सो तोर । तेरा तुझकौं सौंपता, क्या लागै है मोर ॥ कबीर कह… Read More

4 वर्ष ago

विश्वास भरोसा,बिनु बिस्वास भगति नहिं तेहि बिनु द्रवहिं न रामु।

बिनु बिस्वास भगति नहिं तेहि बिनु द्रवहिं न रामु। काकभुशुण्डि ने कहा हे पक्षीराज गरुड़! निज-सुख (आत्मानंद) के बिना क्या… Read More

4 वर्ष ago

संशय भ्रम शंका,जेहि बिधि मोह भयउ प्रभु मोही। सोउ सब कथा सुनावउँ तोही॥

जेहि बिधि मोह भयउ प्रभु मोही। निर्गुण ब्रह्म बुद्धि को शान्त करता है, किंतु सगुण ब्रह्म जीव के हृदय को… Read More

4 वर्ष ago

राम कथा कलिकामद गाई । सुजन संजीवन मूर सुहाई ।।

राम कथा कलिकामद गाई । कलियुग में मनचाहा  फल देनेवाले कामधेनु, कल्पवृक्ष, चिन्तामणि ये दिव्य साधन अब सुलभ नहीं हैं।… Read More

4 वर्ष ago

पार्वती विवाह,सतीं मरत हरि सन बरु मागा। जनम जनम सिव पद अनुरागा॥

सतीं मरत हरि सन बरु मागा। पर्वती विवाह- शिव जी के मना करने पर भी सती जी अपने पिता दक्ष… Read More

4 वर्ष ago

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। लंकनी हनुमान जी से बोली हृदय में भगवान का नाम धारण करके जो भी काम… Read More

4 वर्ष ago

तुम्ह सारिखे संत प्रिय मोरें।धरउँ देह नहिं आन निहोरें॥

तुम्ह सारिखे संत प्रिय मोरें। भगवान रामजी का विभीषणजी के माध्यम हम सभी को दिव्य संदेश- मनुष्य की ममता नौ जगह रहती… Read More

5 वर्ष ago