देखहु मुनि अबिबेकु हमारा। पार्वती विवाह- शंकर जी ने सप्तऋषियों से कहा की जाकर पार्वती जी की परीक्षा लो सप्तऋषियों… Read More
सौरज धीरज तेहि रथ चाका। तुलसीदास ने रामजी के माध्यम से हम सभी को यह सन्देश दिया कि हमारे जीवन… Read More
रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। तुलसी का धर्म रथ-संसार में विजय प्राप्त करने के लिए धर्म और आचरण एक निर्णायक तत्त्व… Read More
तेहि कौतुक कर मरमु न काहूँ। काकभुशुण्डि हे पक्षीराज! मुझे यहाँ निवास करते सत्ताईस कल्प बीत गए, सम्पूर्ण विश्व में… Read More
नाथ एक संसउ बड़ मोरें। वाल्मीकि रामायण के बाद दूसरी रामकथा तुलसीकृत श्री राम चरित मानस में भरद्वाज रामकथा के… Read More
जब तें रामु ब्याहि घर आए । परम पूज्य संत श्री डोंगरे जी महाराज कहा करते थे जिन परिवारों मे… Read More
देखि देखि आचरन तुम्हारा। वशिष्ठ जी कहते है- ब्रह्मा जी के कहने पर मैंने उपरोहित्य अर्थात ब्राह्मण का कर्म द्वारा… Read More
जब तें सती जाइ तनु त्यागा। पार्वती विवाह- सती के साथ कैलाश पर नित्य कथा होती थी उनके ना रहने… Read More
रचि महेस निज मानस राखा। तुलसी ने मानस सरोवर की तुलना सामान्य सरोवर से कि है जैसे तलाब में प्रायः… Read More
प्रभु पहिचानि परेउ गहि चरना। हनुमान जी ने अपना विप्र रूप का वेष रखकर राम जी से पूछा- हे सावले… Read More