ईस्वर अंस जीव अबिनासी। तुलसीदासजी ने कहा-शुकदेवजी, सनकादि, नारदमुनि आदि जितने भक्त और परम ज्ञानी श्रेष्ठ मुनि हैं, मैं धरती… Read More
दीन दयाल बिरिदु संभारी। प्रार्थना में आप मांग बनाए रखें या न रखें, लेकिन दीन भाव जरूर बनाए रखें। दीन… Read More
जय जय राम कथा|जय श्री राम कथा। तुलसीदास जी द्वारा महिमा- संजीवनी बूटी से मरे हुए लोग भी जीवित हो… Read More
पर हित लागि तजइ जो देही। काम देव ने विचार किया कि मैंने अभी तक अपने सामने किसी को कुछ… Read More
मम दरसन फल परम अनूपा। भगवान राम का स्वभाव सहज और सरल है। ऐसा स्वभाव जिस भक्त का होता है… Read More
राम सप्रेम कहेउ मुनि पाहीं। नाथ कहिअ हम केहि मग जाहीं॥ राम जी ने हमेशा सभी की सलाह से कार्य… Read More
हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई॥ राम अवतार के कारण भाव वाले भक्त का, भगवान पर… Read More
मेरा मुझ में कुछ नहीं,जो कुछ है सो तोर । तेरा तुझकौं सौंपता, क्या लागै है मोर ॥ कबीर कह… Read More
बिनु बिस्वास भगति नहिं तेहि बिनु द्रवहिं न रामु। काकभुशुण्डि ने कहा हे पक्षीराज गरुड़! निज-सुख (आत्मानंद) के बिना क्या… Read More
जेहि बिधि मोह भयउ प्रभु मोही। काकभुशुण्डि का संशय! हे पक्षीराज! मुझे यहाँ निवास करते सत्ताईस कल्प बीत गए॥ इहाँ… Read More