संशय भ्रम शंका,जेहि बिधि मोह भयउ प्रभु मोही। सोउ सब कथा सुनावउँ तोही॥

4 years ago

जेहि बिधि मोह भयउ प्रभु मोही। निर्गुण ब्रह्म बुद्धि को शान्त करता है, किंतु सगुण ब्रह्म जीव के हृदय को… Read More

राम कथा कलिकामद गाई । सुजन संजीवन मूर सुहाई ।।

4 years ago

राम कथा कलिकामद गाई । कलियुग में मनचाहा  फल देनेवाले कामधेनु, कल्पवृक्ष, चिन्तामणि ये दिव्य साधन अब सुलभ नहीं हैं।… Read More

पार्वती विवाह,सतीं मरत हरि सन बरु मागा। जनम जनम सिव पद अनुरागा॥

4 years ago

सतीं मरत हरि सन बरु मागा। पर्वती विवाह- शिव जी के मना करने पर भी सती जी अपने पिता दक्ष… Read More

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥

4 years ago

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। लंकनी हनुमान जी से बोली हृदय में भगवान का नाम धारण करके जो भी काम… Read More

तुम्ह सारिखे संत प्रिय मोरें।धरउँ देह नहिं आन निहोरें॥

5 years ago

तुम्ह सारिखे संत प्रिय मोरें। भगवान रामजी का विभीषणजी के माध्यम हम सभी को दिव्य संदेश- मनुष्य की ममता नौ जगह रहती… Read More

साखामग कै बड़ि मनुसाई। साखा तें साखा पर जाई॥

5 years ago

साखामग कै बड़ि मनुसाई। हनुमान जी की दीनता- हनुमान को ही अष्ट सिद्धि और नव निधियों का दाता कहा गया… Read More

रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जान निहारा॥

6 years ago

रामहि केवल प्रेमु पिआरा। गोपियों ने कहा-हे उद्धवजी! हम जानते हैं कि संसार में किसी से  आशा न रखना ही… Read More

चंद्रोदय,कह प्रभु ससि महुँ मेचकताई। कहहु काह निज निज मति भाई॥

6 years ago

कह प्रभु ससि महुँ मेचकताई। सुबेल पर्वत पर भगवान बैठे है रामजी को चन्द्रमा के कलंक को  देखकर पुलस्त्य कुल… Read More

जोरि पानि प्रभु कीन्ह प्रनामू। पिता समेत लीन्ह निज नामू॥

6 years ago

जोरि पानि प्रभु कीन्ह प्रनामू। हम सभी कक्षा एक से  केवल और केवल यही  गाते आ रहे है। जीवन हो… Read More

परहित बस जिन्ह के मन माहीं ।तिन्ह कहुँ जग दुर्लभ कछु नाहीं ॥

6 years ago

परहित बस जिन्ह के मन माहीं । संत कहते है आत्म कल्याण से मनुष्य पर प्रभु की कृपा नहीं हो… Read More