बंधन काटि गयो उरगादा। रण की शोभा तब ही होती है जब बराबर के वीरों का युद्ध हो हे उमा… Read More
मोरेहु कहें न संसय जाहीं। पार्वती जी के मन में संशय- जगत को पवित्र करनेवाले सच्चिदानंद की जय हो, इस… Read More
एकरूप तुम्ह भ्राता दोऊ। श्री राम जी के मन में संशय- बालि और सुग्रीव के जन्म के विषय में एक… Read More
देखहु मुनि अबिबेकु हमारा। पार्वती विवाह- शंकर जी ने सप्तऋषियों से कहा की जाकर पार्वती जी की परीक्षा लो सप्तऋषियों… Read More
सौरज धीरज तेहि रथ चाका। तुलसीदास ने रामजी के माध्यम से हम सभी को यह सन्देश दिया कि हमारे जीवन… Read More
रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। तुलसी का धर्म रथ-संसार में विजय प्राप्त करने के लिए धर्म और आचरण एक निर्णायक तत्त्व… Read More
नाथ एक संसउ बड़ मोरें। वाल्मीकि रामायण के बाद दूसरी रामकथा तुलसीकृत श्री राम चरित मानस में भरद्वाज रामकथा के… Read More
जब तें रामु ब्याहि घर आए । परम पूज्य संत श्री डोंगरे जी महाराज कहा करते थे जिन परिवारों मे… Read More
जेहि बिधि मोह भयउ प्रभु मोही। काकभुशुण्डि का संशय! हे पक्षीराज! मुझे यहाँ निवास करते सत्ताईस कल्प बीत गए॥ इहाँ… Read More
राम कथा कलिकामद गाई । मंगलाचरण जय जय राम कथा । जय श्री राम कथा।। इसे श्रवन कर मिट जाती… Read More