देखि देखि आचरन तुम्हारा। वशिष्ठ जी कहते है- ब्रह्मा जी के कहने पर मैंने उपरोहित्य अर्थात ब्राह्मण का कर्म द्वारा… Read More
जब तें सती जाइ तनु त्यागा। पार्वती विवाह- सती के साथ कैलाश पर नित्य कथा होती थी उनके ना रहने… Read More
रचि महेस निज मानस राखा। तुलसी ने मानस सरोवर की तुलना सामान्य सरोवर से कि है जैसे तलाब में प्रायः… Read More
प्रभु पहिचानि परेउ गहि चरना। हनुमान जी ने अपना विप्र रूप का वेष रखकर राम जी से पूछा- हे सावले… Read More
ईस्वर अंस जीव अबिनासी। तुलसीदासजी ने कहा-शुकदेवजी, सनकादि, नारदमुनि आदि जितने भक्त और परम ज्ञानी श्रेष्ठ मुनि हैं, मैं धरती… Read More
दीन दयाल बिरिदु संभारी। प्रार्थना में आप मांग बनाए रखें या न रखें, लेकिन दीन भाव जरूर बनाए रखें। दीन… Read More
जय जय राम कथा|जय श्री राम कथा। तुलसीदास जी द्वारा महिमा- संजीवनी बूटी से मरे हुए लोग भी जीवित हो… Read More
पर हित लागि तजइ जो देही। काम देव ने विचार किया कि मैंने अभी तक अपने सामने किसी को कुछ… Read More
हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई॥ राम अवतार के कारण भाव वाले भक्त का, भगवान पर… Read More
सतीं मरत हरि सन बरु मागा। पर्वती विवाह- शिव जी के मना करने पर भी सती जी अपने पिता दक्ष… Read More