हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी। तुम्ह देखी सीता मृगनैनी॥ हे पक्षियों! हे पशुओं! हे भौंरों की पंक्तियों! तुमने कहीं… Read More
तब रघुपति जानत सब कारन। श्रीरामजी को जहाँ भी कार्य आरंभ में हर्ष हुआ है पर कार्य की सफलता में… Read More
सलाह,भल न कीन्ह तैं निसिचर नाहा। कुम्भकर्ण की रावण को सलाह-तुम राक्षसो के नाथ हो।तुम्हे ऐसा कर्म नहीं करना चाहिए जिससे… Read More
कर्म कमण्डल कर गहे,तुलसी जहँ लग जाय। तुलसीदास ने कहा देने वाले स्रोत-नदी, समुद्र, कुएँ, वृक्ष आदि समर्थ भी हैं… Read More
केहि बिधि अस्तुति करौं तुम्हारी। संत कहते है संसार सागर को पार करने का सबसे सरल उपाय यदि कोई है… Read More
रे त्रिय चोर कुमारग गामी। रावण का माता जानकी को सुमुखि कहने का भाव यह है कि मैं तुम्हारे सुन्दर… Read More
राम जी के जीवन में (कई बेहतरीन योग फिर भी इतना संघर्ष)जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल। राम… Read More
नारद सिख जे सुनहिं नर नारी। सप्तऋषि ने पार्वती को भटकाने के लिए बहुत कुछ कहा:-जो स्त्री-पुरुष नारद की सीख… Read More
जरा मरन दुख रहित तनु समर जितै जनि कोउ। प्रताप भानु के मुठी में तीनो के तीन धर्म अर्थ काम… Read More
होइहि भजनु न तामस देहा। विभीषण में दीनता का भाव- विभीषण हनुमान से बोल रहे है "तामस तनु कछु साधन… Read More