goswami tulsidas krit ramcharitmanas

सरल,हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी। तुम्ह देखी सीता मृगनैनी॥

हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी। तुम्ह देखी सीता मृगनैनी॥ हे पक्षियों! हे पशुओं! हे भौंरों की पंक्तियों! तुमने कहीं… Read More

3 वर्ष ago

सरल,तब रघुपति जानत सब कारन। उठे हरषि सुर काजु सँवारन॥

तब रघुपति जानत सब कारन। श्रीरामजी को जहाँ भी कार्य आरंभ में हर्ष हुआ है पर कार्य की सफलता में… Read More

3 वर्ष ago

सलाह,भल न कीन्ह तैं निसिचर नाहा। अब मोहि आइ जगाएहि काहा॥

सलाह,भल न कीन्ह तैं निसिचर नाहा। कुम्भकर्ण की रावण को सलाह-तुम राक्षसो के नाथ हो।तुम्हे ऐसा कर्म नहीं  करना चाहिए जिससे… Read More

3 वर्ष ago

कर्म कमण्डल कर गहे,तुलसी जहँ लग जाय।सरिता, सागर, कूप जल

कर्म कमण्डल कर गहे,तुलसी जहँ लग जाय। तुलसीदास ने कहा देने वाले स्रोत-नदी, समुद्र, कुएँ,  वृक्ष आदि समर्थ भी हैं… Read More

3 वर्ष ago

सबरी प्रसंग, केहि बिधि अस्तुति करौं तुम्हारी। अधम जाति मैं जड़मति भारी॥

केहि बिधि अस्तुति करौं तुम्हारी। संत कहते है संसार सागर को पार करने का सबसे सरल उपाय यदि कोई है… Read More

3 वर्ष ago

रे त्रिय चोर कुमारग गामी। खल मल रासि मंदमति कामी॥

रे त्रिय चोर कुमारग गामी। रावण का माता जानकी को सुमुखि कहने का भाव यह है कि मैं तुम्हारे सुन्दर… Read More

3 वर्ष ago

राम जी के जीवन में (कई बेहतरीन योग फिर भी इतना संघर्ष)जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल।

राम जी के जीवन में (कई बेहतरीन योग फिर भी इतना संघर्ष)जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल। राम… Read More

3 वर्ष ago

नारद सिख जे सुनहिं नर नारी। अवसि होहिं तजि भवनु भिखारी॥

नारद सिख जे सुनहिं नर नारी। सप्तऋषि ने पार्वती को भटकाने के लिए बहुत कुछ कहा:-जो स्त्री-पुरुष नारद की सीख… Read More

3 वर्ष ago

जरा मरन दुख रहित तनु समर जितै जनि कोउ। एकछत्र रिपुहीन महि।

जरा मरन दुख रहित तनु समर जितै जनि कोउ। प्रताप भानु के मुठी में तीनो के तीन धर्म अर्थ काम… Read More

3 वर्ष ago

होइहि भजनु न तामस देहा। मन क्रम बचन मंत्र दृढ़ एहा॥

होइहि भजनु न तामस देहा। विभीषण में दीनता का भाव- विभीषण हनुमान से बोल रहे है तामस तनु कछु साधन… Read More

3 वर्ष ago