कह बालि सुनु भीरु प्रिय समदरसी रघुनाथ।

3 years ago

कह बालि सुनु भीरु प्रिय समदरसी रघुनाथ। तारा ने बाली से कहा कि हे नाथ! सुनिए,हे नाथ ये वही सुग्रीव… Read More

नारद सिख जे सुनहिं नर नारी। अवसि होहिं तजि भवनु भिखारी॥

3 years ago

नारद सिख जे सुनहिं नर नारी। सप्तऋषि ने पार्वती को भटकाने के लिए बहुत कुछ कहा:-जो स्त्री-पुरुष नारद की सीख… Read More

जौं बिनु बोलें जाहु भवानी। रहइ न सीलु सनेहु न कानी॥

3 years ago

जौं बिनु बोलें जाहु भवानी। शिव जी के मन को भाने का कारण- यज्ञ भगवान का अंग है उसका दर्शन… Read More

सलाह,बार बार बिनवउँ मुनि तोही। जिमि यह कथा सुनायहु मोही॥

3 years ago

बार बार बिनवउँ मुनि तोही। शिवजी ने नारदजी से कहा हे मुनि! मैं तुमसे बार-बार विनती करता हूँ कि जिस… Read More

जरा मरन दुख रहित तनु समर जितै जनि कोउ। एकछत्र रिपुहीन महि।

3 years ago

जरा मरन दुख रहित तनु समर जितै जनि कोउ। प्रताप भानु के मुठी में तीनो के तीन धर्म अर्थ काम… Read More

राम सप्रेम कहेउ मुनि पाहीं। नाथ कहिअ हम केहि मग जाहीं॥

3 years ago

राम सप्रेम कहेउ मुनि पाहीं।  प्रभु श्री राम स्वयं विष्णु के अवतार थे। उनके पास असीम शक्तियां थी, परंतु उन्होंने… Read More

असरन सरन बिरदु संभारी। मोहि जनि तजहु भगत हितकारी।।

3 years ago

असरन सरन बिरदु संभारी। अंगद ने कहा पिता के मरने पर में अशरण अर्थात अनाथ हो गया था तब आपने… Read More

कारन कवन नाथ नहिं आयउ। जानि कुटिल किधौं मोहि बिसरायउ।।

3 years ago

कारन कवन नाथ नहिं आयउ। भरत की दीनता=भरतजी जैसा संत जिसको राम जी भजते हैं। बृहस्पति जी इंद्र से भरतजी… Read More

मैं निसिचर अति अधम सुभाऊ। सुभ आचरनु कीन्ह नहिं काऊ॥

3 years ago

मैं निसिचर अति अधम सुभाऊ। विभीषण जी ने कहा-नाथ दसानन कर मैं भ्राता।  अपनी अधमता दिखाने के लिए अपने को… Read More

गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर। चरन कमल रज चाहति

3 years ago

गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर। राम शब्द का अर्थ परम ब्रह्म है। कालिदासजीने भी कहा हरि का… Read More