manaschintan
  • goswami tulsidas krit ramcharitmanas
  • जीवन जीने की राह
  • रामचरितमानस चिंतन

गुरु महिमा,गुर बिनु भव निध तरइ न कोई। जौं बिरंचि संकर सम होई॥

गुर बिनु भव निध तरइ न कोई। तीन लोक नौ खण्ड में गुरु से बड़ा… Read More

6 years ago
  • goswami tulsidas krit ramcharitmanas
  • जीवन जीने की राह
  • रामचरितमानस चिंतन
  • रामायण

मनुष्य शरीर,देह धरे कर यह फलु भाई। भजिअ राम सब काम बिहाई।।

देह धरे कर यह फलु भाई।  मनुष्य को जो देह से प्यार है उसमे कोई… Read More

6 years ago
  • goswami tulsidas krit ramcharitmanas
  • ramcharitmanas sampurn ramayan
  • जीवन जीने की राह
  • रामचरितमानस चिंतन

प्रार्थना,सीता राम चरन रति मोरें। अनुदिन बढ़उ अनुग्रह तोरें॥

सीता राम चरन रति मोरें। तुलसीदास जी अपने भगवान राम से कह रहे- हे रघुवीर,… Read More

6 years ago
  • goswami tulsidas krit ramcharitmanas
  • जीवन जीने की राह
  • रामचरितमानस चिंतन
  • रामायण

नाम की महिमा,रामनाम की औषधि खरी नियत से खाय। अंगरोग व्यापे नहीं

रामनाम की औषधि खरी नियत से खाय। राम नाम की बड़ी अद्भुत महिमा है। बस,… Read More

6 years ago
  • goswami tulsidas krit ramcharitmanas
  • जीवन जीने की राह
  • रामचरितमानस चिंतन
  • रामायण

मागी नाव न केवटु आना। कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना।।

मागी नाव न केवटु आना। जब सुमंत्र जी ने रामजी से वापस चलने को कहा-… Read More

6 years ago
« Previous

All Rights Reserved

Powered by AMPforWP