गुरु महिमा,गुर बिनु भव निध तरइ न कोई। जौं बिरंचि संकर सम होई॥
गुर बिनु भव निध तरइ न कोई। तीन लोक नौ खण्ड में गुरु से बड़ा… Read More
5 years ago
गुर बिनु भव निध तरइ न कोई। तीन लोक नौ खण्ड में गुरु से बड़ा… Read More
देह धरे कर यह फलु भाई। मनुष्य को जो देह से प्यार है उसमे कोई… Read More
सीता राम चरन रति मोरें। तुलसीदास जी अपने भगवान राम से कह रहे- हे रघुवीर,… Read More
रामनाम की औषधि खरी नियत से खाय। राम नाम की बड़ी अद्भुत महिमा है। बस,… Read More
मागी नाव न केवटु आना। जब सुमंत्र जी ने रामजी से वापस चलने को कहा-… Read More