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कर्म कमण्डल कर गहे,तुलसी जहँ लग जाय।सरिता, सागर, कूप जल

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कर्म कमण्डल कर गहे,तुलसी जहँ लग जाय।सरिता, सागर, कूप जल बूँद न अधिक समाय।
कर्म कमण्डल कर गहे,तुलसी जहँ लग जाय।सरिता, सागर, कूप जल बूँद न अधिक समाय।

कर्म कमण्डल कर गहे,तुलसी जहँ लग जाय।

तुलसीदास ने कहा देने वाले स्रोत-नदी, समुद्र, कुएँ,  वृक्ष आदि समर्थ भी हैं और उदार भी, किन्तु वे (कमण्डलु=संन्यासियों का जलपात्र जो धातु, लकड़ी या दरियाई नारियल आदि का होता है )की धारण क्षमता से अधिक उसे दे ही  नहीं सकते। कमण्डल  अधिक जल पाने की प्रबल कामना लेकर दुनिया में कहीं भी घूम आये, चाहे जितनी विनती-मनुहार कर ले, किन्तु उसे अपनी धारण क्षमता से अधिक एक बूँद भी नहीं मिल सकती।देने वाला चाहे जितना समर्थ और उदार हो तथा लेने वाला चाहे जितना लालायित हो, लेन-देन तो पात्रता पर निर्भर करती है। यह तो जीव की  भूल  है कि कृपापात्र बनने के इच्छुक व्यक्ति अपनी पात्रता बढ़ाने की साधना करने के स्थान पर कृपासिन्धु से अधिक उदारता दिखाने की प्रार्थना करते रहते हैं। (दाता=देने वाला)  यदि अधिक उदारता दिखाये भी , और कुछ अधिक जल उड़ेल भी दे, तो वह जल  इधर-उधर बिखर जायेगा, कुछ काम नहीं आयेगा। वर्षा में पानी  बरसता है, किन्तु बड़े तालाबों से लेकर छोटे घरेलू बर्तनों तक में रुकता उतना ही पानी है, जितना वे धारण कर पाते हैं। इस को समझकर कृपा पाने के इच्छुक व्यक्ति जितना समय और प्रयास दाता को अधिक उदार बनाने  में लगाते हैं, उतना प्रयास  यदि अपनी पात्रता बढ़ाने में लगाने लगें, तो बात बनने लगे। 


कर्म कमण्डल कर गहे,तुलसी जहँ लग जाय।
सरिता, सागर, कूप जल बूँद न अधिक समाय।

 एक सुंदर भजन
उनकी करुणा में कोई कमी है नही
पात्रता में हमारी कमी रह गयी।।
उनकी ममता में कोई कमी है नही
योग्यता में हमारी कमी रह गयी।।
देह दुर्लभ दिया देव प्रभु ने हमें
जो है आधार सुख साधानो का बिमल
जो है आधार सुख साधानो का बिमल।।
उनकी समता में कोई कमी है नही
पात्रता में हमारी कमी रह गयी
उनकी समता में कोई कमी है नही
पात्रता में हमारे कमी रह गयी।।
प्रति दिवस आके मिलते है हमको प्रभु
फिर भी उनको ना हमने निहारा कभी
रवि के उगाने में कोई कमी है नही
नेत्राता में हमारे कमी रह गयी
रवि के उगाने में कोई कमी है नही
नेत्र ता में हमारे कमी रह गयी।।
दोष देता उन्हे नीच गिरधर व्यथा
दोष देता उन्हे नीच गिरधर व्यथा
छोड़ता है नही दोष दुरवसना
छोड़ता है नही दोष दुरवसना
उनकी क्षमता में कोई कमी है नही
सौम्यता में हमारे कमी रह गयी।।
उनकी करुणा में कोई कमी है नही
उनकी करुणा में कोई कमी है नही
पात्रता में हमारे कमी रह गयी
पात्रता में हमारी कमी रह गयी
योग्यता में हमारे कमी रह गयी
योग्यता में हमारे कमी रह गयी।।

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