रामचरितमानस से जीवन का मार्गदर्शन | भक्ति चिंतन और संत विचार

प्रार्थना,सीता राम चरन रति मोरें। अनुदिन बढ़उ अनुग्रह तोरें॥

बिनती करउँ जोरि कर रावन। सुनहु मान तजि मोर सिखावन॥

 

नर तन सम नहिं कवनिउ देही। जीव चराचर जाचत तेही।।

श्रीरामचरितमानस का सार, संतों के विचार और भक्ति से जुड़े प्रेरणादायक लेख। जीवन को अर्थपूर्ण बनाने वाले आध्यात्मिक चिंतन का संग्रह।

मानस चिंतन तुलसी कृत रामायण में दोहा चौपाई अर्थ सहित कई ऐसे मंत्र हैं कवि का मूल उद्देश्य राम के चरित्र के माध्यम से सभी मानव समाज को नैतिकता एवं सदाचार की शिक्षा देना रहा है।सिय राम मय सब जग जानी।करहु प्रणाम जोरी जुग पानी ॥पूरे संसार में श्री राम का निवास है, सब में भगवान हैं और हमें उनको हाथ जोड़कर प्रणाम कर लेना चाहिए। (सूत्र) दवाई खाकर, पीकर,सूंघकर ,लगाकर,पर केवल कथा ही है जो सुन कर विश्राम देती है! तुलसी बाबा ने इस ग्रंथ तो अपने अंतर के सुख ,अपने ह्र्दय के आनन्द के लिए लिखा।

रामचरितमानस से जीवन का मार्गदर्शन | भक्ति चिंतन और संत विचार

मन की शांति और जीवन का सार

जामवंत, कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना।।

 

तुम्ह सारिखे संत प्रिय मोरें।धरउँ देह नहिं आन निहोरें॥

 

 

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