रामायण

प्रेम,बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा॥

बार बार प्रभु चहइ रामजी हनुमान जी को बार-बार उठाना चाहते है, परंतु प्रेम में… Read More

कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।।

कह रघुबीर देखु रन प्रभु रामजी अपना पराक्रम कभी नहीं कहा- उनकी सदा रीति है… Read More

गहि सरनागति राम की, भवसागर की नाव।रहिमन जगत उधार को,

गहि सरनागति राम की सभी युगों में शरणागति की महिमा भारी है सारे वेद, बेदान्त,… Read More

परहित,वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर।

परहित,वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर। परमारथ के कारने, साधुन धरा सरीर।।… Read More

सरल,गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्हसन आयसु मागा॥

गुर पद बंदि सहित अनुरागा। रामचन्द्रजी ने मुनि से आज्ञा माँगी समस्त जगत के स्वामी राम सुंदर मतवाले श्रेष्ठ हाथी… Read More

सरल,जानहु मुनि तुम्ह मोर सुभाऊ। जन सन कबहुँ कि करऊँ दुराऊ॥

जानहु मुनि तुम्ह मोर सुभाऊ। राम जी नारद से हे मुनि! यहाँ प्रभु ने अपना… Read More

सरल,रघुबंसिन्ह कर सहज सुभाऊ। मनु कुपंथ पगु धरइ न काऊ॥

रघुबंसिन्ह कर सहज श्री रामचन्द्रजी भाई लक्ष्मण से बोले- सहज सुभाऊ' अर्थात्‌ उनका मन स्वतः वश… Read More

सरल,अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी॥

अति बिनीत मृदु सीतल बानी। परशुरामजी (समर=युद्ध)करने पर तुले हुए और रामजी युद्ध नहीं करना… Read More

सरल,तब कर कमल जोरि रघुराई। बोले बचन श्रवन सुखदाई।।

तब कर कमल जोरि रघुराई। यहाँ रामजी ने हाथ जोड़ कर अपने ऐश्वर्य को छुपाया… Read More