प्रेम,बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा॥ Leave a Comment प्रेम,बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा॥ Read More »
मानस चिंतन,जानें बिनु न होइ परतीती । बिनु परतीति होइ नहि प्रीती । Leave a Comment मानस चिंतन,जानें बिनु न होइ परतीती । बिनु परतीति होइ नहि प्रीती । Read More »
कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।। Leave a Comment कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।। Read More »
गहि सरनागति राम की, भवसागर की नाव।रहिमन जगत उधार को, Leave a Comment गहि सरनागति राम की, भवसागर की नाव।रहिमन जगत उधार को, Read More »
परहित,वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर। Leave a Comment परहित,वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर। Read More »
सरल,गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्हसन आयसु मागा॥ Leave a Comment सरल,गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्हसन आयसु मागा॥ Read More »
सरल,जानहु मुनि तुम्ह मोर सुभाऊ। जन सन कबहुँ कि करऊँ दुराऊ॥ Leave a Comment सरल,जानहु मुनि तुम्ह मोर सुभाऊ। जन सन कबहुँ कि करऊँ दुराऊ॥ Read More »
सरल,रघुबंसिन्ह कर सहज सुभाऊ। मनु कुपंथ पगु धरइ न काऊ॥ Leave a Comment सरल,रघुबंसिन्ह कर सहज सुभाऊ। मनु कुपंथ पगु धरइ न काऊ॥ Read More »
सरल,अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी॥ Leave a Comment सरल,अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी॥ Read More »
सरल,तब कर कमल जोरि रघुराई। बोले बचन श्रवन सुखदाई।। Leave a Comment सरल,तब कर कमल जोरि रघुराई। बोले बचन श्रवन सुखदाई।। Read More »