प्रार्थना में दीन भाव जरूर बनाए रखें। दीन दयाल बिरिदु संभारी।
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रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास द्वारा 16वीं शताब्दी में रचित एक महान ग्रंथ है, जिसे अवधी भाषा में लिखा गया है। यह ग्रंथ भगवान राम के चरित्र, आदर्शों और जीवन की दिव्य कथा का वर्णन करता है। यह मूलतः महर्षि वाल्मीकि रचित संस्कृत रामायण पर आधारित है, परंतु तुलसीदासजी ने इसे भक्ति-रस और जनभाषा में रचकर जनसामान्य के लिए सुलभ बनाया।